सूरह अल-मआरिज

وَتَكُونُ ٱلْجِبَالُ كَٱلْعِهْنِ

Wa takūnul-jibālu kal-‘ihn(i).

और पर्वत रंग-बिरंगे ऊन के सदृश हो जाएँगे

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