सूरह अल-मआरिज

لِّلسَّآئِلِ وَٱلْمَحْرُومِ

Lis-sā'ili wal-maḥrūm(i).

माँगनेवालों और वंचित का एक ज्ञात और निश्चित हक़ होता है,

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