सूरह अल-हिज्र
وَأَرْسَلْنَا ٱلرِّيَـٰحَ لَوَٰقِحَ فَأَنزَلْنَا مِنَ ٱلسَّمَآءِ مَآءً فَأَسْقَيْنَـٰكُمُوهُ وَمَآ أَنتُمْ لَهُۥ بِخَـٰزِنِينَ
Wa arsalnar-riyāḥa lawāqiha fa anzalnā minas-samā'i mā'an fa asqainākumūh(u), wa mā antum lahū bikhāzinīn(a).
हम ही वर्षा लानेवाली हवाओं को भेजते है। फिर आकाश से पानी बरसाते है और उससे तुम्हें सिंचित करते है। उसके ख़जानादार तुम नहीं हो
📝 टिप्पणी
396) इसका अर्थ बादलों, पौधों और अन्य चीज़ों को सिंचित (निषेचित/परागण) करना है।
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