सूरह अल-हिज्र

لَا يَمَسُّهُمْ فِيهَا نَصَبٌ وَمَا هُم مِّنْهَا بِمُخْرَجِينَ

Lā yamassuhum fīhā naṣabuw wa mā hum minhā bimukhrajīn(a).

उन्हें वहाँ न तो कोई थकान और तकलीफ़ पहुँचेगी औऱ न वे वहाँ से कभी निकाले ही जाएँगे

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