सूरह अल-हिज्र

فَإِذَا سَوَّيْتُهُۥ وَنَفَخْتُ فِيهِ مِن رُّوحِى فَقَعُوا۟ لَهُۥ سَـٰجِدِينَ

Fa iżā sawwaituhū wa nafakhtu fīhi mir rūḥī fa qa‘ū lahū sājidīn(a).

तो जब मैं उसे पूरा बना चुकूँ और उसमें अपनी रूह फूँक दूँ तो तुम उसके आगे सजदे में गिर जाना!"

📝 टिप्पणी
397) यहाँ "सजदा" (दंडवत) करने का अर्थ पूजा या इबादत करना नहीं है, बल्कि सम्मान प्रकट करना है, ठीक वैसे ही जैसे पैगंबर यूसुफ़ (अलैहिस्सलाम) के भाइयों ने उनके प्रति सम्मान में सजदा किया था।

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