सूरह ता-हा

يَوْمَ يُنفَخُ فِى ٱلصُّورِ ۚ وَنَحْشُرُ ٱلْمُجْرِمِينَ يَوْمَئِذٍ زُرْقًا

Yauma yunfakhu fiṣ-ṣūri wa naḥsyurul-mujrimīna yauma'iżin zurqā(n).

जिस दिन सूर फूँका जाएगा और हम अपराधियों को उस दिन इस दशा में इकट्ठा करेंगे कि उनकी आँखे नीली पड़ गई होंगी

📝 टिप्पणी
481) सूर (शंख) का दूसरा फूंका जाना वह फूंक है जो मनुष्यों को उनकी कब्रों से दोबारा उठाने अर्थात् उन्हें पुनर्जीवित करने के लिए होगा।

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