सूरह ता-हा

وَمَن يَعْمَلْ مِنَ ٱلصَّـٰلِحَـٰتِ وَهُوَ مُؤْمِنٌ فَلَا يَخَافُ ظُلْمًا وَلَا هَضْمًا

Wa may ya‘mal minaṣ-ṣāliḥāti wa huwa mu'minun falā yakhāfu ẓulmaw wa lā haḍmā(n).

किन्तु जो कोई अच्छे कर्म करे और हो वह मोमिन, तो उसे न तो किसी ज़ुल्म का भय होगा और न हक़ मारे जाने का

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