सूरह ता-हा
قَالُوا۟ مَآ أَخْلَفْنَا مَوْعِدَكَ بِمَلْكِنَا وَلَـٰكِنَّا حُمِّلْنَآ أَوْزَارًا مِّن زِينَةِ ٱلْقَوْمِ فَقَذَفْنَـٰهَا فَكَذَٰلِكَ أَلْقَى ٱلسَّامِرِىُّ
Qālū mā akhlafnā mau‘idaka bimalkinā wa lākinnā ḥummilnā auzāram min zīnatil-qaumi fa qażafnāhā fa każālika alqas-sāmiriyy(u).
उन्होंने कहा, "हमने आपसे किए हुए वादे के विरुद्ध अपने अधिकार से कुछ नहीं किया, बल्कि लोगों के ज़ेवरों के बोझ हम उठाए हुए थे, फिर हमने उनको (आग में) फेंक दिया, सामरी ने इसी तरह प्रेरित किया था।"
📝 टिप्पणी
476) इस आयत में जिस भारी बोझ का उल्लेख है, उसका अर्थ शारीरिक (भौतिक) रूप से भारी होना भी हो सकता है और गुनाह (पाप) का बोझ भी, क्योंकि उन्होंने मिस्र के निवासियों से मांगे हुए आभूषण वापस नहीं किए थे। 477) उन्हें मिस्रियों के सोने के आभूषण लाने के लिए कहा गया था, फिर सामरी ने उनसे उन आभूषणों को एक गड्ढे में सुलगती हुई आग में फेंकने के लिए कहा ताकि उससे बछड़े के आकार की एक मूर्ति बनाई जा सके। फिर उन सबने सामरी के साथ मिलकर उसे आग में फेंक दिया।