सूरह ता-हा
فَأْتِيَاهُ فَقُولَآ إِنَّا رَسُولَا رَبِّكَ فَأَرْسِلْ مَعَنَا بَنِىٓ إِسْرَٰٓءِيلَ وَلَا تُعَذِّبْهُمْ ۖ قَدْ جِئْنَـٰكَ بِـَٔايَةٍ مِّن رَّبِّكَ ۖ وَٱلسَّلَـٰمُ عَلَىٰ مَنِ ٱتَّبَعَ ٱلْهُدَىٰٓ
Fa'tiyāhu fa qūlā innā rasūlā rabbika fa arsil ma‘anā banī isrā'īl(a), wa lā tu‘ażżibhum, qad ji'nāka bi'āyatim mir rabbik(a), was-salāmu ‘alā manittaba‘al-hudā.
अतः जाओ, उसके पास और कहो, हम तेरे रब के रसूल है। इसराईल की सन्तान को हमारे साथ भेज दे। और उन्हें यातना न दे। हम तेरे पास तेरे रब की निशानी लेकर आए है। और सलामती है उसके लिए जो संमार्ग का अनुसरण करे!
📝 टिप्पणी
470) मिस्र में, बनी इसराईल फ़िरऔन के दास (गुलाम) बन गए थे। उन्हें जबरन बड़ी-बड़ी इमारतें और शहर बनाने के काम में लगाया जाता था। इसलिए, हज़रत मूसा (अलयहिस्सलाम) ने फ़िरऔन से उन्हें मुक्त करने की मांग की।