सूरह अन-नमल

وَلَا تَحْزَنْ عَلَيْهِمْ وَلَا تَكُن فِى ضَيْقٍ مِّمَّا يَمْكُرُونَ

Wa lā taḥzan ‘alaihim wa lā takun fī ḍaiqim mimmā yamkurūn(a).

उनके प्रति शोकाकुल न हो और न उस चाल से दिल तंग हो, जो वे चल रहे है।

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