सूरह अन-नमल
وَكَانَ فِى ٱلْمَدِينَةِ تِسْعَةُ رَهْطٍ يُفْسِدُونَ فِى ٱلْأَرْضِ وَلَا يُصْلِحُونَ
Wa kāna fil-madīnati tis‘atu rahṭiy yufsidūna fil-arḍi wa lā yuṣliḥūn(a).
नगर में नौ जत्थेदार थे जो धरती में बिगाड़ पैदा करते थे, सुधार का काम नहीं करते थे
📝 टिप्पणी
552) इस आयत में नगर (शहर) से तात्पर्य समूद (Samud) की जाति के नगर से है, अर्थात् हिज्र (Hijr) नगर।
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