सूरह अन-नमल

إِنَّكَ لَا تُسْمِعُ ٱلْمَوْتَىٰ وَلَا تُسْمِعُ ٱلصُّمَّ ٱلدُّعَآءَ إِذَا وَلَّوْا۟ مُدْبِرِينَ

Innaka lā tusmi‘ul-mautā wa lā tusmi‘uṣ-ṣummad-du‘ā'a iżā wallau mudbirīn(a).

तुम मुर्दों को नहीं सुना सकते और न बहरों को अपनी पुकार सुना सकते हो, जबकि वे पीठ देकर फिरे भी जा रहें हो।

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