सूरह अज़-ज़ारियात

ذُوقُوا۟ فِتْنَتَكُمْ هَـٰذَا ٱلَّذِى كُنتُم بِهِۦ تَسْتَعْجِلُونَ

Żūqū fitnatakum, hāżal-lażī kuntum bihī tasta‘jilūn(a).

"चखों मज़ा. अपने फ़ितने (उपद्रव) का! यहीं है जिसके लिए तुम जल्दी मचा रहे थे।"

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