सूरह अज़-ज़ारियात

فَمَا ٱسْتَطَـٰعُوا۟ مِن قِيَامٍ وَمَا كَانُوا۟ مُنتَصِرِينَ

Famastaṭā‘ū min qiyāmiw wa mā kānū muntaṣirīn(a).

फिर वे न खड़े ही हो सके और न अपना बचाव ही कर सके

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