सूरह अज़-ज़ारियात

وَتَرَكْنَا فِيهَآ ءَايَةً لِّلَّذِينَ يَخَافُونَ ٱلْعَذَابَ ٱلْأَلِيمَ

Wa taraknā fīhā āyatal lil-lażīna yakhāfūnal-‘ażābal-alīm(a).

इसके पश्चात हमने वहाँ उन लोगों के लिए एक निशानी छोड़ दी, जो दुखद यातना से डरते है

📝 टिप्पणी
702) कुछ मुफ़स्सिरों (व्याख्याताओं) के अनुसार, अल्लाह की इस निशानी से तात्पर्य पत्थरों के उन ढेरों से है जिनका उपयोग लूत की कौम (जाति) को नष्ट करने के लिए किया गया था। वहीं कुछ अन्य विद्वानों का कहना है कि इससे तात्पर्य एक ऐसे जलाशय (झील) से है जिसका पानी काला और बदबूदार है।

सभी आयत 60 आयत
आज ही पढ़ना शुरू करें

क़ुरआन पढ़ना अपनी दैनिक दिनचर्या का हिस्सा बनाएं। क़ुरआन टुडे आपको विकर्षणों के बिना पढ़ना जारी रखने में मदद करता है, एक सरल, तेज़, निजी और आरामदायक अनुभव के साथ।