सूरह अज़-ज़ारियात
وَٱلسَّمَآءَ بَنَيْنَـٰهَا بِأَيْي۟دٍ وَإِنَّا لَمُوسِعُونَ
Was-samā'a banaināhā bi'aidiw wa innā lamūsi‘ūn(a).
आकाश को हमने अपने हाथ के बल से बनाया और हम बड़ी समाई रखनेवाले है
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وَٱلسَّمَآءَ بَنَيْنَـٰهَا بِأَيْي۟دٍ وَإِنَّا لَمُوسِعُونَ
Was-samā'a banaināhā bi'aidiw wa innā lamūsi‘ūn(a).
आकाश को हमने अपने हाथ के बल से बनाया और हम बड़ी समाई रखनेवाले है
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