सूरह अज़-ज़ारियात
إِنَّكُمْ لَفِى قَوْلٍ مُّخْتَلِفٍ
Innakum lafī qaulim mukhtalif(in).
निश्चय ही तुम उस बात में पड़े हुए हो जिनमें कथन भिन्न-भिन्न है
📝 टिप्पणी
701) इसका अर्थ पैगंबर मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) और कुरआन के बारे में बहुदेववादियों (मुशरिकों) के मतभेद (अलग-अलग राय) से है।
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