सूरह अल-इंसान

فَٱصْبِرْ لِحُكْمِ رَبِّكَ وَلَا تُطِعْ مِنْهُمْ ءَاثِمًا أَوْ كَفُورًا

Faṣbir liḥukmi rabbika wa lā tuṭi‘ minhum āṡiman au kafūrā(n).

अतः अपने रब के हुक्म और फ़ैसले के लिए धैर्य से काम लो और उनमें से किसी पापी या कृतघ्न का आज्ञापालन न करना

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