सूरह अल-इंसान
يُدْخِلُ مَن يَشَآءُ فِى رَحْمَتِهِۦ ۚ وَٱلظَّـٰلِمِينَ أَعَدَّ لَهُمْ عَذَابًا أَلِيمًۢا
Yudkhilu may yasyā'u fī raḥmatih(ī), waẓ-ẓālimīna a‘adda lahum ‘ażāban alīmā(n).
वह जिसे चाहता है अपनी दयालुता में दाख़िल करता है। रहे ज़ालिम, तो उनके लिए उसने दुखद यातना तैयार कर रखी है
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