सूरह अल-इंसान
عَيْنًا يَشْرَبُ بِهَا عِبَادُ ٱللَّهِ يُفَجِّرُونَهَا تَفْجِيرًا
‘Ainay yasyrabu bihā ‘ibādullāhi yufajjirūnahā tafjīrā(n).
उस स्रोत का क्या कहना! जिस पर बैठकर अल्लाह के बन्दे पिएँगे, इस तरह कि उसे बहा-बहाकर (जहाँ चाहेंगे) ले जाएँगे
सभी आयत 31 आयत