सूरह अल-इंसान

وَمِنَ ٱلَّيْلِ فَٱسْجُدْ لَهُۥ وَسَبِّحْهُ لَيْلًا طَوِيلًا

Wa minal-laili fasjud lahū wa sabbiḥhu lailan ṭawīlā(n).

और रात के कुछ हिस्से में भी उसे सजदा करो, लम्बी-लम्बी रात तक उसकी तसबीह करते रहो

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