सूरह अन-नाज़िआत

وَأَهْدِيَكَ إِلَىٰ رَبِّكَ فَتَخْشَىٰ

Wa ahdiyaka ilā rabbika fa takhsyā.

"और मैं तेरे रब की ओर तेरा मार्गदर्शन करूँ कि तु (उससे) डरे?"

सभी आयत 46 आयत
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