सूरह अन-नाज़िआत

يَوْمَ يَتَذَكَّرُ ٱلْإِنسَـٰنُ مَا سَعَىٰ

Yauma yatażakkarul-insānu mā sa‘ā.

उस दिन मनुष्य जो कुछ भी उसने प्रयास किया होगा उसे याद करेगा

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