सूरह यूनुस

وَمَا كَانَ ٱلنَّاسُ إِلَّآ أُمَّةً وَٰحِدَةً فَٱخْتَلَفُوا۟ ۚ وَلَوْلَا كَلِمَةٌ سَبَقَتْ مِن رَّبِّكَ لَقُضِىَ بَيْنَهُمْ فِيمَا فِيهِ يَخْتَلِفُونَ

Wa mā kānan-nāsu illā ummataw wāḥidatan fakhtalafū, wa lau lā kalimatun sabaqat mir rabbika laquḍiya bainahum fīmā fīhi yakhtalifūn(a).

सारे मनुष्य एक ही समुदाय थे। वे तो स्वयं अलग-अलग हो रहे। और यदि तेरे रब की ओर से पहले ही एक बात निश्चित न हो गई होती, तो उनके बीच का फ़ैसला कर दिया जाता जिसमें वे मतभेद कर रहे हैं

📝 टिप्पणी
347) अर्थात्, यह निर्णय कि संसार में मनुष्यों के आपसी मतभेदों का अंतिम फैसला परलोक (आखिरत) में किया जाएगा।

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