सूरह यूनुस

إِنَّ رَبَّكُمُ ٱللَّهُ ٱلَّذِى خَلَقَ ٱلسَّمَـٰوَٰتِ وَٱلْأَرْضَ فِى سِتَّةِ أَيَّامٍ ثُمَّ ٱسْتَوَىٰ عَلَى ٱلْعَرْشِ ۖ يُدَبِّرُ ٱلْأَمْرَ ۖ مَا مِن شَفِيعٍ إِلَّا مِنۢ بَعْدِ إِذْنِهِۦ ۚ ذَٰلِكُمُ ٱللَّهُ رَبُّكُمْ فَٱعْبُدُوهُ ۚ أَفَلَا تَذَكَّرُونَ

Inna rabbakumullāhul -lażī khalaqas-samāwāti wal-arḍa fī sittati ayyāmin ṡummastawā ‘alal-‘arsyi yudabbirul-amr(a), mā min syafī‘in illā mim ba‘di iżnih(ī), żālikumullāhu rabbukum fa‘budūh(u), afalā tażakkarūn(a).

निस्संदेह तुम्हारा रब वही अल्लाह है, जिसने आकाशों और धरती को छः दिनों में पैदा किया, फिर सिंहासन पर विराजमान होकर व्यवस्था चला रहा है। उसकी अनुज्ञा के बिना कोई सिफ़ारिश करनेवाला भी नहीं है। वह अल्लाह है तुम्हारा रब। अतः उसी की बन्दगी करो। तो क्या तुम ध्यान न दोगे?

📝 टिप्पणी
341) सूरह अल-अअराफ़/7: 54 की पादटिप्पणी (फुटनोट) देखें। 342) अर्श पर प्रतिष्ठित होना (इसतीवा अलल-अर्श) उसकी महानता और पवित्रता के अनुकूल है।

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