सूरह यूनुस

وَلَقَدْ بَوَّأْنَا بَنِىٓ إِسْرَٰٓءِيلَ مُبَوَّأَ صِدْقٍ وَرَزَقْنَـٰهُم مِّنَ ٱلطَّيِّبَـٰتِ فَمَا ٱخْتَلَفُوا۟ حَتَّىٰ جَآءَهُمُ ٱلْعِلْمُ ۚ إِنَّ رَبَّكَ يَقْضِى بَيْنَهُمْ يَوْمَ ٱلْقِيَـٰمَةِ فِيمَا كَانُوا۟ فِيهِ يَخْتَلِفُونَ

Wa laqad bawwa'nā banī isrā'īla mubawwa'a ṣidqiw wa razaqnāhum minaṭ-ṭayyibāt(i), famākhtalafū ḥattā jā'ahumul-‘ilm(u), inna rabbaka yaqḍī bainahum yaumal-qiyāmati fīmā kānū fīhi yakhtalifūn(a).

और हमने इसराईल की सन्तान को अच्छा, सम्मानित ठिकाना दिया औ उन्हें अच्छी आजीविका प्रदान की। फिर उन्होंने उस समय विभेद किया, जबकि ज्ञान उनके पास आ चुका था। निश्चय ही तुम्हारा रब क़ियामत के दिन उनके बीच उस चीज़ का फ़ैसला कर देगा, जिसमें वे विभेद करते रहे है

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