सूरह इब्राहीम

يُثَبِّتُ ٱللَّهُ ٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ بِٱلْقَوْلِ ٱلثَّابِتِ فِى ٱلْحَيَوٰةِ ٱلدُّنْيَا وَفِى ٱلْـَٔاخِرَةِ ۖ وَيُضِلُّ ٱللَّهُ ٱلظَّـٰلِمِينَ ۚ وَيَفْعَلُ ٱللَّهُ مَا يَشَآءُ

Yuṡabbitullāhul-lażīna āmanū bil-qauliṣ-ṣābiti fil-ḥayātid-dun-yā wa fil-ākhirah(ti), wa yuḍillullāhuẓ-ẓālimīn(a), wa yaf‘alullāhu mā yasyā'(u).

ईमान लानेवालों को अल्लाह सुदृढ़ बात के द्वारा सांसारिक जीवन में भी परलोक में भी सुदृढ़ता प्रदान करता है और अत्याचारियों को अल्लाह विचलित कर देता है। और अल्लाह जो चाहता है, करता है

📝 टिप्पणी
388) यहाँ "दृढ़ वचन" (क़ौल-ए-साबित) से तात्पर्य उसी "कलमा तैयबा" से है जिसका उल्लेख ऊपर आयत संख्या 24 में किया गया है।

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