सूरह इब्राहीम

ٱلْحَمْدُ لِلَّهِ ٱلَّذِى وَهَبَ لِى عَلَى ٱلْكِبَرِ إِسْمَـٰعِيلَ وَإِسْحَـٰقَ ۚ إِنَّ رَبِّى لَسَمِيعُ ٱلدُّعَآءِ

Al-ḥamdu lillāhil-lażī wahaba lī ‘alal-kibari ismā‘īla wa isḥāq(a), inna rabbī lasamī‘ud-du‘ā'(i).

सारी प्रशंसा है उस अल्लाह की जिसने बुढ़ापे के होते हुए भी मुझे इसमाईल और इसहाक़ दिए। निस्संदेह मेरा रब प्रार्थना अवश्य सुनता है

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