सूरह इब्राहीम
وَقَدْ مَكَرُوا۟ مَكْرَهُمْ وَعِندَ ٱللَّهِ مَكْرُهُمْ وَإِن كَانَ مَكْرُهُمْ لِتَزُولَ مِنْهُ ٱلْجِبَالُ
Wa qad makarū makrahum wa ‘indallāhi makruhum, wa in kāna makruhum litazūla minhul-jibāl(u).
वे अपनी चाल चल चुक हैं। अल्लाह के पास भी उनके लिए चाल मौजूद थी, यद्यपि उनकी चाल ऐसी ही क्यों न रही हो जिससे पर्वत भी अपने स्थान से टल जाएँ
📝 टिप्पणी
391) इस आयत में "पहाड़" से तात्पर्य अल्लाह तआला की शरिया (कानून) से है, जो पहाड़ की तरह सुदृढ़ और अटल है।
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