सूरह इब्राहीम

وَقَدْ مَكَرُوا۟ مَكْرَهُمْ وَعِندَ ٱللَّهِ مَكْرُهُمْ وَإِن كَانَ مَكْرُهُمْ لِتَزُولَ مِنْهُ ٱلْجِبَالُ

Wa qad makarū makrahum wa ‘indallāhi makruhum, wa in kāna makruhum litazūla minhul-jibāl(u).

वे अपनी चाल चल चुक हैं। अल्लाह के पास भी उनके लिए चाल मौजूद थी, यद्यपि उनकी चाल ऐसी ही क्यों न रही हो जिससे पर्वत भी अपने स्थान से टल जाएँ

📝 टिप्पणी
391) इस आयत में "पहाड़" से तात्पर्य अल्लाह तआला की शरिया (कानून) से है, जो पहाड़ की तरह सुदृढ़ और अटल है।

सभी आयत 52 आयत
आज ही पढ़ना शुरू करें

क़ुरआन पढ़ना अपनी दैनिक दिनचर्या का हिस्सा बनाएं। क़ुरआन टुडे आपको विकर्षणों के बिना पढ़ना जारी रखने में मदद करता है, एक सरल, तेज़, निजी और आरामदायक अनुभव के साथ।