सूरह अर-रूम
مِنَ ٱلَّذِينَ فَرَّقُوا۟ دِينَهُمْ وَكَانُوا۟ شِيَعًا ۖ كُلُّ حِزْبٍۭ بِمَا لَدَيْهِمْ فَرِحُونَ
Minal-lażīna farraqū dīnahum wa kānū syiya‘ā(n), kullu ḥizbim bimā ladaihim fariḥūn(a).
उन लोगों में से जिन्होंने अपनी दीन (धर्म) को टुकड़े-टुकड़े कर डाला और गिरोहों में बँट गए। हर गिरोह के पास जो कुछ है, उसी में मग्न है
📝 टिप्पणी
589) अपने धर्म (दीन) को टुकड़े-टुकड़े करने से तात्पर्य एकेश्वरवाद (तौहीद) के धर्म को छोड़ देना और अपनी इच्छाओं (मनमर्ज़ी) के अनुसार विभिन्न मान्यताओं को अपना लेना है.
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