सूरह अज़-ज़ुख़रुफ़
وَمَن يَعْشُ عَن ذِكْرِ ٱلرَّحْمَـٰنِ نُقَيِّضْ لَهُۥ شَيْطَـٰنًا فَهُوَ لَهُۥ قَرِينٌ
Wa may ya‘syu ‘an żikrir-raḥmāni nuqayyiḍ lahū syaiṭānan fahuwa lahū qarīn(un).
जो रहमान के स्मरण की ओर से अंधा बना रहा है, हम उसपर एक शैतान नियुक्त कर देते है तो वही उसका साथी होता है
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