सूरह अज़-ज़ुख़रुफ़
أَفَأَنتَ تُسْمِعُ ٱلصُّمَّ أَوْ تَهْدِى ٱلْعُمْىَ وَمَن كَانَ فِى ضَلَـٰلٍ مُّبِينٍ
Afa anta tusmi‘uṣ-ṣumma au tahdil-‘umya wa man kāna fī ḍalālim mubīn(in).
क्या तुम बहरों को सुनाओगे या अंधो को और जो खुली गुमराही में पड़ा हुआ हो उसको राह दिखाओगे?
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