सूरह अज़-ज़ुख़रुफ़
وَإِنَّهُۥ لَذِكْرٌ لَّكَ وَلِقَوْمِكَ ۖ وَسَوْفَ تُسْـَٔلُونَ
Wa innahū lażikrul laka wa liqaumik(a), wa saufa tus'alūn(a).
निश्चय ही वह अनुस्मृति है तुम्हारे लिए और तुम्हारी क़ौम के लिए। शीघ्र ही तुम सबसे पूछा जाएगा
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