सूरह अज़-ज़ुख़रुफ़
بَلْ مَتَّعْتُ هَـٰٓؤُلَآءِ وَءَابَآءَهُمْ حَتَّىٰ جَآءَهُمُ ٱلْحَقُّ وَرَسُولٌ مُّبِينٌ
Bal matta‘tu hā'ulā'i wa ābā'ahum ḥattā jā'ahumul-ḥaqqu wa rasūlum mubīn(un).
नहीं,बल्कि मैं उन्हें और उनके बाप-दादा को जीवन-सुख प्रदान करता रहा, यहाँ तक कि उनके पास सत्य और खोल-खोलकर बतानेवाला रसूल आ गया
📝 टिप्पणी
679) पैगंबर इब्राहीम (अलैहिस्सलाम) के कुछ वंशज तौहीद (एकेश्वरवाद) को भूल गए और अल्लाह द्वारा दिए गए जीवन और वरदानों का आभार व्यक्त नहीं किया। अल्लाह ने उन्हें तुरंत दंडित नहीं किया, बल्कि उन्हें तब तक सुख-सुविधाएं दीं जब तक कि उसने कुरआन नाज़िल नहीं फरमाया और उनका मार्गदर्शन करने के लिए एक रसूल (पैगंबर) नहीं भेजा।