सूरह अज़-ज़ुख़रुफ़
لَا يُفَتَّرُ عَنْهُمْ وَهُمْ فِيهِ مُبْلِسُونَ
Lā yufattaru ‘anhum wa hum fīhi mublisūn(a).
वह (यातना) कभी उनपर से हल्की न होगी और वे उसी में निराश पड़े रहेंगे
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لَا يُفَتَّرُ عَنْهُمْ وَهُمْ فِيهِ مُبْلِسُونَ
Lā yufattaru ‘anhum wa hum fīhi mublisūn(a).
वह (यातना) कभी उनपर से हल्की न होगी और वे उसी में निराश पड़े रहेंगे
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