सूरह अज़-ज़ुख़रुफ़

ٱلْأَخِلَّآءُ يَوْمَئِذٍۭ بَعْضُهُمْ لِبَعْضٍ عَدُوٌّ إِلَّا ٱلْمُتَّقِينَ

Al-akhillā'u yauma'iżim ba‘ḍuhum liba‘ḍin ‘aduwwun illal-muttaqīn(a).

उस दिन सभी मित्र परस्पर एक-दूसरे के शत्रु होंगे सिवाय डर रखनेवालों के। -

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