सूरह अल-फ़त्ह
وَعَدَكُمُ ٱللَّهُ مَغَانِمَ كَثِيرَةً تَأْخُذُونَهَا فَعَجَّلَ لَكُمْ هَـٰذِهِۦ وَكَفَّ أَيْدِىَ ٱلنَّاسِ عَنكُمْ وَلِتَكُونَ ءَايَةً لِّلْمُؤْمِنِينَ وَيَهْدِيَكُمْ صِرَٰطًا مُّسْتَقِيمًا
Wa‘adakumullāhu magānima kaṡīratan ta'khużūnahā fa‘ajjala lakum hāżihī wa kaffa aidiyan-nāsi ‘ankum, wa litakūna āyatal lil-mu'minīna wa yahdiyakum ṣirāṭam mustaqīmā(n).
अल्लाह ने तुमसे बहुत-सी गंनीमतों का वादा किया हैं, जिन्हें तुम प्राप्त करोगे। यह विजय तो उसने तुम्हें तात्कालिक रूप से निश्चित कर दी। और लोगों के हाथ तुमसे रोक दिए (कि वे तुमपर आक्रमण करने का साहस न कर सकें) और ताकि ईमानवालों के लिए एक निशानी हो। और वह सीधे मार्ग की ओर तुम्हारा मार्गदर्शन करे
📝 टिप्पणी
694) अल्लाह ने मुसलमानों से प्रचुर मात्रा में युद्ध की लूट (ग़नीमत के माल) का वादा किया था। एक शुरुआत (प्रस्तावना) के रूप में, अल्लाह ने इसे खैबर के युद्ध में उन्हें प्रदान किया।