सूरह अल-फ़त्ह
لِّتُؤْمِنُوا۟ بِٱللَّهِ وَرَسُولِهِۦ وَتُعَزِّرُوهُ وَتُوَقِّرُوهُ وَتُسَبِّحُوهُ بُكْرَةً وَأَصِيلًا
Litu'minū billāhi wa rasūlihī wa tu‘azzirūhu wa tuwaqqirūh(u), wa tusabbiḥūhu bukrataw wa aṣīlā(n).
ताकि तुम अल्लाह और उसके रसूल पर ईमान लाओ, उसे सहायता पहुँचाओ और उसका आदर करो, और प्रातःकाल और संध्या समय उसकी तसबीह करते रहो
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