सूरह अल-फ़त्ह

إِذْ جَعَلَ ٱلَّذِينَ كَفَرُوا۟ فِى قُلُوبِهِمُ ٱلْحَمِيَّةَ حَمِيَّةَ ٱلْجَـٰهِلِيَّةِ فَأَنزَلَ ٱللَّهُ سَكِينَتَهُۥ عَلَىٰ رَسُولِهِۦ وَعَلَى ٱلْمُؤْمِنِينَ وَأَلْزَمَهُمْ كَلِمَةَ ٱلتَّقْوَىٰ وَكَانُوٓا۟ أَحَقَّ بِهَا وَأَهْلَهَا ۚ وَكَانَ ٱللَّهُ بِكُلِّ شَىْءٍ عَلِيمًا

Iż ja‘alal-lażīna kafarū fī qulūbihimul-ḥamiyyata ḥamiyyatal-jāhiliyyati fa anzalallāhu sakīnatahū ‘alā rasūlihī wa ‘alal-mu'minīna wa alzamahum kalimatat-taqwā wa kānū aḥaqqa bihā wa ahlahā, wa kānallāhu bikulli syai'in ‘alīmā(n).

याद करो जब इनकार करनेवाले लोगों ने अपने दिलों में हठ को जगह दी, अज्ञानपूर्ण हठ को; तो अल्लाह ने अपने रसूल पर और ईमानवालो पर सकीना (प्रशान्ति) उतारी और उन्हें परहेज़गारी (धर्मपरायणता) की बात का पाबन्द रखा। वे इसके ज़्यादा हक़दार और इसके योग्य भी थे। अल्लाह तो हर चीज़ जानता है

📝 टिप्पणी
695) "कलिमा-ए-तक़वा" (परहेज़गारी का वाक्य) का अर्थ "कलिमा-ए-तौहीद" (एकेश्वरवाद का वाक्य) है।

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