सूरह अल-क़मर
أَكُفَّارُكُمْ خَيْرٌ مِّنْ أُو۟لَـٰٓئِكُمْ أَمْ لَكُم بَرَآءَةٌ فِى ٱلزُّبُرِ
Akuffārukum khairum min ulā'ikum am lakum barā'atun fiz-zubur(i).
क्या तुम्हारे काफ़िर कुछ उन लोगो से अच्छे है या किताबों में तुम्हारे लिए कोई छुटकारा लिखा हुआ है?
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