सूरह अर-रअद

الٓمٓر ۚ تِلْكَ ءَايَـٰتُ ٱلْكِتَـٰبِ ۗ وَٱلَّذِىٓ أُنزِلَ إِلَيْكَ مِن رَّبِّكَ ٱلْحَقُّ وَلَـٰكِنَّ أَكْثَرَ ٱلنَّاسِ لَا يُؤْمِنُونَ

Alif lām mīm rā, tilka āyātul-kitāb(i), wal-lażī unzila ilaika mir rabbikal-ḥaqqu wa lākinna akṡaran-nāsi lā yu'minūn(a).

अलिफ़॰ लाम॰ मीम॰ रा॰। ये किताब की आयतें है औऱ जो कुछ तुम्हारे रब की ओर से तुम्हारी ओर अवतरित हुआ है, वह सत्य है, किन्तु अधिकतर लोग मान नहीं रहे है

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