सूरह अर-रअद

وَيَقُولُ ٱلَّذِينَ كَفَرُوا۟ لَوْلَآ أُنزِلَ عَلَيْهِ ءَايَةٌ مِّن رَّبِّهِۦ ۗ قُلْ إِنَّ ٱللَّهَ يُضِلُّ مَن يَشَآءُ وَيَهْدِىٓ إِلَيْهِ مَنْ أَنَابَ

Wa yaqūlul-lażīna kafarū lau lā unzila ‘alaihi āyatum mir rabbih(ī), qul innallāha yuḍillu may yasyā'u wa yahdī ilaihi man anāb(a).

जिन लोगों ने इनकार किया वे कहते है, "उसपर उसके रब की ओर से कोई निशानी क्यों नहीं उतरी?" कहो, "अल्लाह जिसे चाहता है पथभ्रष्ट कर देता है। अपनी ओर से वह मार्गदर्शन उसी का करता है जो रुजू होता है।"

📝 टिप्पणी
380) अल्लाह तआला किसी व्यक्ति को इसलिए भटका देता है (गुमराह कर देता है) क्योंकि वह उसके मार्गदर्शन (हिदायत) को स्वीकार नहीं करता। वह किसी व्यक्ति को उसके मार्गदर्शन के प्रति आज्ञाकारिता के कारण हिदायत देता है।

सभी आयत 43 आयत
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