सूरह अर-रअद

۞ وَإِن تَعْجَبْ فَعَجَبٌ قَوْلُهُمْ أَءِذَا كُنَّا تُرَٰبًا أَءِنَّا لَفِى خَلْقٍ جَدِيدٍ ۗ أُو۟لَـٰٓئِكَ ٱلَّذِينَ كَفَرُوا۟ بِرَبِّهِمْ ۖ وَأُو۟لَـٰٓئِكَ ٱلْأَغْلَـٰلُ فِىٓ أَعْنَاقِهِمْ ۖ وَأُو۟لَـٰٓئِكَ أَصْحَـٰبُ ٱلنَّارِ ۖ هُمْ فِيهَا خَـٰلِدُونَ

Wa in ta‘jab fa ‘ajabun qauluhum a'iżā kunnā turāban a'innā lafī khalqin jadīd(in), ulā'ikal-lażīna kafarū birabbihim, wa ulā'ikal-aglālu fī a‘nāqihim, wa ulā'ika aṣḥābun-nār(i), hum fīhā khālidūn(a).

अब यदि तुम्हें आश्चर्य ही करना है तो आश्चर्य की बात तो उनका यह कहना है कि ,"क्या जब हम मिट्टी हो जाएँगे तो क्या हम नए सिरे से पैदा भी होंगे?" वही हैं जिन्होंने अपने रब के साथ इनकार की नीति अपनाई और वही है, जिनकी गर्दनों मे तौक़ पड़े हुए है और वही आग (में पड़ने) वाले है जिसमें उन्हें सदैव रहना है

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