सूरह अर-रअद
سَلَـٰمٌ عَلَيْكُم بِمَا صَبَرْتُمْ ۚ فَنِعْمَ عُقْبَى ٱلدَّارِ
Salāmun ‘alaikum bimā ṣabartum fa ni‘ma ‘uqbad-dār(i).
(वे कहेंगे) "तुमपर सलाम है उसके बदले में जो तुमने धैर्य से काम लिया।" अतः क्या ही अच्छा परिणाम है आख़िरत के घर का!
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