सूरह हूद

خَـٰلِدِينَ فِيهَا مَا دَامَتِ ٱلسَّمَـٰوَٰتُ وَٱلْأَرْضُ إِلَّا مَا شَآءَ رَبُّكَ ۚ إِنَّ رَبَّكَ فَعَّالٌ لِّمَا يُرِيدُ

Khālidīna fīhā mā dāmatis-samāwātu wal-arḍu illā mā syā'a rabbuk(a), inna rabbaka fa‘‘ālul limā yurīd(u).

वहाँ वे सदैव रहेंगे, जब तक आकाश और धरती स्थिर रहें, बात यह है कि तुम्हारे रब की इच्छा ही चलेगी। तुम्हारा रब जो चाहे करे

📝 टिप्पणी
362) यह वाक्यांश एक रूपक (किनाया) है जिसका उद्देश्य नरक (जहन्नम) में उनके हमेशा रहने की व्याख्या करना है। परलोक (आख़िरत) के संसार के भी अपने आकाश और धरती हैं।

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