सूरह हूद
وَقِيلَ يَـٰٓأَرْضُ ٱبْلَعِى مَآءَكِ وَيَـٰسَمَآءُ أَقْلِعِى وَغِيضَ ٱلْمَآءُ وَقُضِىَ ٱلْأَمْرُ وَٱسْتَوَتْ عَلَى ٱلْجُودِىِّ ۖ وَقِيلَ بُعْدًا لِّلْقَوْمِ ٱلظَّـٰلِمِينَ
Wa qīla yā arḍubla‘ī mā'aki wa yā samā'u aqli‘ī wa gīḍal-mā'u wa quḍiyal-amru wastawat ‘alal-jūdiyyi wa qīla bu‘dal lil-qaumiẓ-ẓālimīn(a).
और कहा गया, "ऐ धरती! अपना पानी निगल जा और ऐ आकाश! तू थम जा।" अतएव पानी तह में बैठ गया और फ़ैसला चुका दिया गया और वह (नाव) जूदी पर्वत पर टिक गई औऱ कह दिया गया, "फिटकार हो अत्याचारी लोगों पर!"
📝 टिप्पणी
356) जूदी पर्वत (माउंट जूदी) दक्षिणी आर्मेनिया में स्थित है और इसकी सीमा मेसोपोटामिया से लगती है।