सूरह हूद
وَلَا تَرْكَنُوٓا۟ إِلَى ٱلَّذِينَ ظَلَمُوا۟ فَتَمَسَّكُمُ ٱلنَّارُ وَمَا لَكُم مِّن دُونِ ٱللَّهِ مِنْ أَوْلِيَآءَ ثُمَّ لَا تُنصَرُونَ
Wa lā tarkanū ilal-lażīna ẓalamū fa tamassakumun-nār(u), wa mā lakum min dūnillāhi min auliyā'a ṡumma lā tunṣarūn(a).
उन लोगों की ओर तनिक भी न झुकना, जिन्होंने अत्याचार की नीति अपनाई हैं, अन्यथा आग तुम्हें आ लिपटेगी - और अल्लाह से हटकर तुम्हारा कोई संरक्षक मित्र नहीं - फिर तुम्हें कोई सहायता भी न मिलेगी
📝 टिप्पणी
364) सूरह आले इमरान/3: 28 की पादटिप्पणी (फुटनोट) देखें।
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