सूरह अल-अनकबूत

۞ فَـَٔامَنَ لَهُۥ لُوطٌ ۘ وَقَالَ إِنِّى مُهَاجِرٌ إِلَىٰ رَبِّىٓ ۖ إِنَّهُۥ هُوَ ٱلْعَزِيزُ ٱلْحَكِيمُ

Fa āmana lahū lūṭ(un), wa qāla innī muhājirun ilā rabbī, innahū huwal-‘azīzul-ḥakīm(u).

फिर लूत ने उसकी बात मानी औऱ उसने कहा, "निस्संदेह मैं अपने रब की ओर हिजरत करता हूँ। निस्संदेह वह अत्यन्त प्रभुत्वशाली, तत्वदर्शी है।"

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