सूरह अल-अनकबूत
لِيَكْفُرُوا۟ بِمَآ ءَاتَيْنَـٰهُمْ وَلِيَتَمَتَّعُوا۟ ۖ فَسَوْفَ يَعْلَمُونَ
Liyakfurū bimā ātaināhum, fasaufa ya‘lamūn(a).
ताकि जो कुछ हमने उन्हें दिया है उसके प्रति वे इस तरह कृतघ्नता दिखाएँ, और ताकि इस तरह से मज़े उड़ा ले। अच्छा तो वे शीघ्र ही जान लेंगे
सभी आयत 69 आयत