सूरह अल-अनकबूत

يَـٰعِبَادِىَ ٱلَّذِينَ ءَامَنُوٓا۟ إِنَّ أَرْضِى وَٰسِعَةٌ فَإِيَّـٰىَ فَٱعْبُدُونِ

Yā ‘ibādiyal-lażīna āmanū inna arḍī wāsi‘atun fa iyyāya fa‘budūn(i).

ऐ मेरे बन्दों, जो ईमान लाए हो! निस्संदेह मेरी धरती विशाल है। अतः तुम मेरी ही बन्दगी करो

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